मेरा जन्म एक मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ , पापा अध्यापक थे और माँ ग्रहणी । बचपन से मेरे पापा मेरे हीरो थे तो अनजाने ही उनकी विचार धारा मेरे व्यतित्व का हिस्सा बनती गयी । मैंने बनस्पति शास्त्र से परास्नातक किया , उसके उपरांत विवाह हुआ और घर गृहस्ती एवं बच्चों को सँभालते -सँभालते कितना समय निकल गया पता ही नहीं चला , अब जब बच्चे बड़े हैं तो सोचा पुनः खुद के लिए समय निकाल लूँ , और आपके सामने हूँ