जिंदगी की शाम
कायदों में बीतती जिंदगी की शाम हो आयी, चलो बंजारों की बस्ती से भी नाता जोड़ लेते हैं । बहुत कहा, सुना, समझाया, समझा सबको, चलो अब खुद का नाता…
कायदों में बीतती जिंदगी की शाम हो आयी, चलो बंजारों की बस्ती से भी नाता जोड़ लेते हैं । बहुत कहा, सुना, समझाया, समझा सबको, चलो अब खुद का नाता…
माँ मैं तेरे जैसी हो गयी हूँ , अब सुबह उठने के लिए अलार्म तुम हुआ करती थीं,आज मैं सबका अलार्म हूँ । सबकी जरुरते पूरी करते खुद रीत गयीं…